१. ‘राजस्थानी भाषा’ शब्द का पहली बार आधिकारिक रूप से प्रयोग जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने किया था. उन्होंने १९१२ में अपने संग्रह- ‘भारत का भाषाई सर्वेक्षण’ में इसका जिक्र किया था. भाषाविद ग्रियर्सन ने राजस्थान की भाषा को क्षेत्रवार कितनी बोलियों में वर्गीकृत किया था ?
क. तीन ख.चार ग. पांच घ. छः
२. पूर्वी राजस्थान में साहित्य की रचना अधिकतर राजस्थानी भाषा की पिंगल शैली में हुई है. पिंगल पर सबसे अधिक प्रभाव किस भाषा का पड़ा है ?
क. मालवी ख. संस्कृत ग. ब्रज घ. हरयाणवी
३. खैराड़ी बोली किस क्षेत्र की पहचान है ?
क. बाड़मेर ख. अलवर ग. डूंगरपुर घ. टोंक
४. शासकों या आम लोगों के नए क्षेत्रों में जाने पर उनकी भाषा भी साथ साथ गए बिना नहीं रहती. स्थानीय बोली को बाहर से आयी बोली थोडा सा बदल ही देती है. मालवी और मारवाड़ी भाषाओँ के मिश्रण को आप किस बोली में देखते हैं ?
क. मेवाती ख. रांगड़ी ग. निमाड़ी घ. हाड़ौती
५. मारवाड़ी को ‘मरुभाषा’ किस ग्रन्थ में कहा गया है ?
क. कुवलयमाला ख. पृथ्वीराज विजय ग.भरतेश्वर बाहुबली घोर घ. नागर समुच्चय
६. ११ वीं सदी से वर्तमान राजस्थान प्रदेश की भाषा के दर्शन होने शुरू हो गए थे. अपभ्रंश और बाद में अन्य भाषाओँ से अलग होने में सदियाँ गुजर गयीं. राजस्थानी भाषा का स्वर्णकाल आया इस अवधि में –
क. १२५० से १३५० ई. में ख. १४०० से १५०० ई. में ग. १५०० से १६५० में घ. १६५० से १८५० में
७. जयपुर, टोंक और अजमेर के आपस में लगते भागों में ढूंढाड़ नदी की के दोनों तरफ की बोली को ढूंढाड़ी कहते हैं. लेकिन जयपुर के शाहपुरा क्षेत्र में यह बोली भी एक बदला सा रूप ले लेती है, जिसे कहते हैं-
क. चौरासी ख. राजावाटी ग. नागरचोल घ. काठेडी
८. नागर अपभ्रंश से राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति बताने वाले विद्वान थे-
क. तेस्सितोरी ख. मोतीलाल मेनारिया ग. ग्रियर्सन घ. के एम मुंशी
९. ग्रियर्सन के अनुसार राजस्थान के मध्य-पूर्वी क्षेत्र की बोली है-
क. अहीरवाटी ख. तौरावाटी ग. हाडौती घ. निमाड़ी
१०. ‘एक माखिचूस के पे कुछ माल मतो हो’ वाक्य किस राजस्थानी बोली का है ?
क. मारवाड़ी ख. मेवाड़ी ग. मेवाती घ. हाड़ौती
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